Poetry

 

ना कविता के नियम पता है
और ना विधा ही मुझे आती है ,
यह बस
ईश्वर की कृपा है
कविता अपने आप बनी जाती है

कविता मैं लिखता नहीं
वो खुद मुझसे लिखवाती है ,
ईश्वर की अनुकम्पा ही बस
मेरे कलम को चलाती है |