हम बिहारी है

क्या कहा? हम बिहारी है,
सही कहा, हम बिहारी है ।

अवधपति भी तो अजर बिहारी है,
द्वारकाधीश कहलाए बांके बिहारी है ।
दोनों ही पूजन के अधिकारी है,
सही कहा, हम बिहारी है ।

महाजनपदों में देश जब था बटा हुआ,
एक दुसरे से अलग-थलग कटा हुआ ।
चन्द्रगुप्त मौर्य ने अखंड भारत बनाया था,
विश्व के माथे पर मुकुट सा सजाया था ।
पाटलिपुत्र इसकी राजधानी थी,
भारत के गौरव की कहानी थी ।
यह इतिहास भी तो हमारी है,
सही कहा, हम बिहारी है ।

भारत ने विश्व को गिनती सिखलाई है,
आर्यभट्ट ने इसी मिट्टी से शून्य उपजाई है ।
नालंदा हमारी ही धरोहर थी,
भारत के ज्ञान की सरोवर थी ।
कालिदास रचनाएँ यहीं तो बनाए थे,
वाल्मीकि रामायण यहीं तो सुनाए थे ।
ज्ञान हमेशा से हमें प्यारी है,
सही कहा, हम बिहारी है ।

बुद्ध को यहीं पर ज्ञान मिला,
बौद्ध धर्म सा सुन्दर पुष्प खिला ।
महावीर इसी धरा पर चलते थे,
अपने ज्ञान से सबको भरते थे ।
गुरु गोविन्द इसी की संतान है,
जिनकी विरासत बड़ी ही महान है ।
धर्मों की नींव भी हमारी है,
सही कहा, हम बिहारी है ।

भूतकाल नहीं अब वर्तमान की बात करते है,
तुम्हारे मष्तिष्क में थोड़ा और ज्ञान भरते है ।
गंवार कह मजाक हमारा बनाते हो,
ना जाने तुम किस बात पर इतराते हो ।
आई आई टी पर मोहर लगती हमारी है,
ज़िद में बनते हम आईएएस अधिकारी है ।
सोए सिंहो के बस जगने की बारी है,
फिर देख लेना दुनिया मुठ्ठी में हमारी है ।
हम हमेशा से ही मेधा के पुजारी है,
हमें समझने की क्षमता नहीं तुम्हारी है ।
हम आज भी अकेले सब पर भारी है,
सही कहा, हम बिहारी है ।
सही कहा, हम बिहारी है ।

निशांत चौबे ‘ अज्ञानी’
२५.०४.२०२२

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