अधूरा मैं रह गया हूँ

तेरे जाने के बाद अधूरा मैं रह गया हूँ
तुझसे बिछड़ने का गम चुपचाप मैं सह गया हूँ ,
चाहता हूँ रोक दूँ समय तो ठीक उसी मोड़ पर
पर, समय के तेज धार में अब मैं बह गया हूँ ।

तेरे जाने के बाद मेरी ख़ुशी खो गयी है
मेरे अधरों पर जो रहती थी वो हँसी खो गयी है ,
तुझसे ही बोलता था मेरे घर का आँगन
मेरी ये ज़िन्दगी अब चुपचाप सी हो गयी है ।

आँखे बंद करूँ तो दिखाई तुम देती हो
‘भैया ‘ बोलती मुझे सुनाई तुम देती हो ,
सोचा ना था ऐसे बिछड़ोगी तुम मुझसे
हमारे रिश्ते की अब विदाई तुम देती हो ।

तेरी डोली की जगह तेरी अर्थी को उठाया
अपने इन्ही हाथों से मैंने तुझको जलाया .
‘रक्षा करूँगा तेरा’ हर राखी पर वचन दिया था
एक भाई होने का मैंने कैसा फ़र्ज़ निभाया ।

माफ़ कर दो मुझे तुम्हें बचा नहीं पाया
तुम्हारे हाथों में मैं मेहँदी रचा नहीं पाया ,
अभी तो गुजरा था राखी का ये पर्व
जी भरकर तुझे सीने से मैं लगा नहीं पाया ।

पता है मुझे तुम अब दोबारा नहीं आओगी
‘भैया’ कहकर मुझे कभी ना फिर बुलाओगी ,
पर इतना अवश्य पता है मुझे कि तुम
अब भी मेरे इस जीवन को हमेशा सजाओगी ।

निशांत चौबे ‘अज्ञानी’
२८.०८.२०१९

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