चाहते

चाहते है भरी
आँखों में मेरी ,
ये जो है रास्ता
लगे यूँ ख्वाब सा ,
ये दूरियाँ
होठों की खामोशियाँ ,
ये काफिला
लो चल पड़ा ।

चाहतों से बना दिल का आशियाँ
प्यार का आसमां वफ़ा के दरमियाँ ,
चाहते आहटे
सारी राहते ,
राह का साथ है
यही तो खास है ।

ख्वाहिशों की इन बारिशों में मन भींगा है जा रहा
राहों की इन बाँहों में मैं खुद को पा रहा ,
थोड़ा मनचला थोड़ा सरफिरा थोड़ा हैरान हूँ
थोड़ा सा बुरा भला भी थोड़ा नादान हूँ ।

चाहते प्यार के ये जो दिल में है
हाँ मेरे हाँ तेरे , ये हर दिल में है ,
चाहते ख्वाब से इन आँखों में भरे
आ जरा पास अब कदम ये चल पड़े ।

निशांत चौबे ‘अज्ञानी’
१६.०६.२०१९

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