तिरंगा

तीन रंगो से बना है ये तिरंगा प्यारा ,
इसके ऊपर ही तो हमने अपना सबकुछ वारा ।
तीन रंगो से बना है ये तिरंगा प्यारा ॥

केसरिया तो माँ के माथे पर सजा शृंगार है
इसमें ही तो है समाया वीरो का अंगार है ,
इसमें ही पुरखो को वो शौर्य का सम्मान है
इसमें ही तो है समाया राणा का आन है ,
इसमें ही बोस के आजादी की हुँकार है
इसमें ही तो है समाया आजाद का ललकार है ,
इसमें ही भगत की वीरता का बखान है
इसमें ही शिवाजी के देश का अभिमान है ,
इसमें ही संतो को वो त्याग और बलिदान है
इसमें ही पद्मिनी का आत्म-सम्मान है ,
इसमें ही शहीदों के खून की पहचान है
इसमें ही तो है समाया शांति का प्रमाण है ।

श्वेत रंग माँ के तन पर सजा परिधान है
इसमें ही विश्व को शांति का पैगाम है ,
इसमें ही मीरा का प्रेम , कबीर का ज्ञान है
इसमें ही तो है समाया संतो की ज़बान है ,
इसमें ही सत्य और अहिंसा का प्रकाश है
इसमें ही तो है समाया बुद्ध का प्रयास है ,
इसमें ही शुद्धता और स्वछता का वास है
इसमें ही तो है समाया पुरातन विश्वास है ,
इसमें ही हिमालय की ढृढ़ता विधमान है
इसमें ही सागर के लहरों की उफान है ,
इसमें ही गंगा का जल,यमुना का धार है
इसमें ही माँ के आँचल का प्यार है ।

हरा माँ के हाथों का कंगन बेमिसाल है
इसमें ही तो है समाया समृद्धि की मशाल है ,
इसमें ही धरती के आभूषण विधमान है
इसमें ही तो है समाया जीवन का सामान है ,
इसमें ही शास्त्री के उद्धघोष की आवाज है
इसमें ही टैगोर के संगीत का अंदाज़ है ,
इसमें ही कलाम के सपनो की आस है
इसमें ही तो है समाया पटेल का विश्वास है ,
इसमें ही किसानो के मेहनत की मिठास है
इसमें ही तो है समाया भारत कुछ खास है ,
इसमें ही प्रकृति के अनगिनत अनुदान है
इसमें ही तो है समाया माँ का सम्मान है ।

अशोक चक्र नित निरंतर प्रगति की पहचान है
इसमें ही तो है समाया कर्त्तव्य का भान है ।

तिरंगे की शान में ही हमारी आन है ,
आओ मिलकर बनाए जो भारत महान है ।

निशांत चौबे ‘ अज्ञानी’
२९.१२.२०१३

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