यादें

बाईस साल की यादें
अपने दिल में समाए हुए ,
मैं आज देखता हूँ तुम्हे
अपनी पलके झुकाए हुए ।

तरसते है लोग जिसका
केवल साथ पाने को ,
सौभाग्य मिला है मुझे
उसपर अधिकार जमाने को ।

ज़िन्दगी की कड़ी धूप में
मिला तेरी ममता की छाँव,
उठा लिया गोद में तूने
जब भी थके मेरे पाँव ।

ज़िन्दगी में मेरी तुमने
रहने दी ना कोई कमी ,
धन-धान्य हो या हो
प्यार भरी आँखों में नमी ।

क्या – क्या यत्न किया तूने
बचपन में खिलाने के लिए ,
तूने ही दिया हौसला मुझे
पहला कदम बढ़ाने के लिए ।

हाथ पकड़कर तुमने मुझे
पढ़ना लिखना है सिखाया ,
अभी तक हमेशा तूने
अपना फ़र्ज़ है निभाया ।

हाथों में तेरी माँ
स्वयं अन्नपूर्णा ही बसती है ,
सारे जहाँ में मुझे केवल
तेरी रोटियां ही जचती है ।

अपनी गोद में सर रखकर
प्यार से वो सहलाना तेरा ,
बहुत याद आता है मुझे
बचपन में वो बहलाना तेरा ।

डाँटती हो जब मुझे तुम
और भी अच्छी लगती हो ,
कभी-कभी मुझे तुम
ईश्वर से सच्ची लगती हो ।

ज़िन्दगी के कोरे कागज़ पर
भरा अपने प्यार का रंग ,
हमेशा दुआ मांगता हूँ
कभी ना छूटे तुम्हारा संग ।

तेरी चेहरे की हँसी पर
अपना जीवन न्यौछार दूँ ,
जितना आज तक ना दिया किसीने
उतना तुम्हे मैं प्यार दूँ ।

जीवन में तुम्हारे मैं
सिर्फ खुशियाँ ही खुशियाँ लाऊँ,
आशीर्वाद दो मुझे तुम
इस सपने को पूरा कर पाऊँ ।

निशांत चौबे ‘ अज्ञानी ‘
१३.०२.२०१२

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