वक़्त बहता जाए

कल – कल बस करता जाए
एक कदम ना आगे बढ़ाए ,
और बैठ कर सोचा करता
कि हिमालय पर चढ़ जाए ।

वक़्त रेत सा बहता जाए
उम्र नित नए रूप दिखाए ,
और प्रत्येक क्षण धीरे – धीरे
काल अपना कदम बढ़ाए ।

ना उम्र इतनी बड़ी है तेरी
ना वक़्त इतना है तेरे पास ,
कि अपने आज को भुलाकर
रखे बस तू कल पर आस ।

जीवन रूपी मुकुट में जड़ा
जवानी वो बेशकीमती हीरा है ,
जिसका मूल्य जानकर ही
तूने वो मुकुट खरीदा है ।

हाँ , जीवन का उपहार तूने
अपने कर्मो से पाया है ,
फिर अपने कर्मो से ही
अब तक इसे गँवाया है ।

जवानी का सदुपयोग ही
जीवन का सम्मान है ,
वक़्त के तेज धार में
बहता इसका अभिमान है ।

अभी जवानी के नशे में
वक़्त से है खेला करता ,
ठहर कुछ देर , फिर देख
वक़्त कैसे है खेल करता ।

बहुत समय पड़ा है
सब सपने सच हो जाएँगे,
जो करना है अभी कर ले
वरना बस सपने ही रह जाएँगे ।

बड़ी अदभुत है जीवन यात्रा
जवानी है सबसे खूबसूरत पड़ाव ,
जरा संभल कर बिताना इसे
अगर है अपने जीवन से लगाव ।

सम्मान करो तुम वक़्त का
फिर ये तुम्हारा सम्मान करेगा ,
वरना क्षण भर में दूर ये
तुम्हारा सब अभिमान करेगा ।

अपनी क्षमताओं को वक़्त दो
फिर क्षमताएँ वो कर दिखाएँगी,
कि आने वाली कई पीढ़ियाँ
सदियों तक तेरा नाम दुहराएँगी ।

निशांत चौबे ‘अज्ञानी’
१७.०१.२०१४

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