राम के नाम में तू खो जा

राम के नाम में तू खो जा ,
डूब जा इसमें इसका हो जा ।

नाम सुमिरके ध्यान करे जो
सेवा में ही मान रखे जो ,
प्यार से सबको गले लगाए
श्रद्धा के जो फूल चढ़ाए,
राम को जो दिल में बसाए
उनके कर्मो को अपनाए.
ज्ञान ही उसका है सहारा
जिसने राम राम पुकारा ।

राम तो तुझमे ही समाए
औरो से क्यूँ आस लगाए ,
अपने को तू जान रे बन्दे
उसको अब तू मान रे बन्दे ,
तेरा जीवन हाथ में तेरे
किस्मत के क्यूँ डाले फेरे ,
भवसागर से जो पार है पाना
राम के नाव में खुद को बिठाना ।

मेरा राम है तेरा खुदा भी
जुड़कर के है वो जुदा भी ,
धर्म के नाम पे लड़ते रहते
जबकि सब एक बात है कहते ,
कहने का बस ढंग अलग है
कपड़े का बस रंग अलग है ,
मुझमें तुझमें अंतर क्या है
हममें उसमें अंतर क्या है ,
एक तत्व से बने है हम सब
आओ मिलकर जाने हम अब ।

जीवन का आधार प्रेम है
सृष्टि का श्रृंगार प्रेम है ,
प्रेम का भूखा उसका ह्रदय है
प्रेम का भूका सबका ह्रदय है ,
फिर क्यूँ नफरत धर्म फैलाए
फिर क्यूँ उसको सब अपनाए,
राम के आदर्शो को निबाहो
अपना जीवन खुद से सजाओ ।

निशांत चौबे ‘ अज्ञानी’
१७.०२.२०१४

About the author

nishantchoubey

Hi! I am Nishant Choubey and I have created this blog to share my views through poetry, art and words.

View all posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *