मैं रहूँ ना रहूँ

मैं रहूँ ना रहूँ , तू रहे ना रहे
मगर अपनी कहानी हमेशा रहे ।

चंद लम्हे रहे , चंद बातें रहे
चंद किस्से रहे , चंद यादें रहे ,
चंद धड़कन रहे , चंद सांसे रहे
चंद खुशियाँ रहे , चंद आहे रहे ।

मैं तेरी धड़कनो को हमेशा सुनूँ,
तू मेरी ख़ामोशी हमेशा सुने ,
मैं रहूँ ना रहूँ , तू रहे ना रहे
मगर अपनी कहानी हमेशा रहे ।

चाँद की रौशनी में नहाई हुई
और मुझको खुद में समाई हुई,
संगेमरमर सा गोरा ये तेरा बदन
और उसपर ये दो कजरारे नयन,
तेरे बातों में जैसे शहद हो मिली
और खुशबु जैसे कली हो खिली |

जबसे आकर तुम हमसे मिले
रहे ना जीवन में कोई गिले,
मैं रहूँ ना रहूँ , तू रहे ना रहे
मगर अपनी कहानी हमेशा रहे ।

बड़ा मासूम दिल है ज़रा ख्याल से
रखना इसे तुम बड़े प्यार से ,
कभी भूले से भी ना दुखाना इसे
अपने सारे गमो को बताना इसे ,
कि ये जीवन हमारी कहानी ही है
अनकहे ख्वाबो कि जबानी ही है ।

मेरी खुशियाँ हमेशा तुझको मिले
तेरा गम तुझसे दूर रहे ,
मैं रहूँ ना रहूँ , तू रहे ना रहे
मगर अपनी कहानी हमेशा रहे ।

निशांत चौबे ‘ अज्ञानी’
०२.०७.२०१३

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