मेरी बहना

तुझको खुशियाँ मिले यही चाहत है
तुझको देखे बिना कैसे राहत है ,
गम हो या हो ख़ुशी
सब मिलके सहना है ,
एक हज़ारो में मेरी बहना है ,
सारी उमर हमें संग रहना है ।

धरती और अम्बर दोनों मिलके कहते है
तेरे दिल में तो बस हम ही रहते है ,
ऐसे ही दिल में तेरे रहना है ,
एक हज़ारो में मेरी बहना है ,
सारी उमर हमें संग रहना है ।

तेरे होठों पर खुशियाँ आँखों में हो प्यार
तेरी खुशबु से महके सारा संसार ,
मेरी गुड़ियाँ मेरा बस इतना कहना है ,
एक हज़ारो में मेरी बहना है ,
सारी उमर हमें संग रहना है ।

निशांत चौबे ‘ अज्ञानी’
२३.०१.२०१५

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