दिल की जुबां

क्या है ये
क्यूँ है ये
मैं ना जानूँ
तू ना जाने
फिर भी मगर
बातें करे
दिल की जुबां …

मैं ना बोलूँ
तू ना बोले
दोनों चुप है
आँखे नम है
फिर भी मगर
बातें करे
दिल की जुबां …

आँखों से ही दिल की बातें
लब्ज़ो में ढल जाती है ,
बिन कहे ही बिन सुने ही
सब कुछ ये कह जाती है ।
आँखे ही बोले
आँखे सुने अब
दोनों ही
बातें करे
दिल की ज़ुबां..

ये जो कहानी बड़ी पुरानी
नई हमेशा मगर बन जाती है ,
देखे तुझको जब भी आँखे
साँसे क्यूँ मगर थम जाती है ।
साँसों से साँसों का रिश्ता
धड़कन से दिल का सपना
हरदम ही बाँटा करे
दिल की जुबां …

निशांत चौबे ‘अज्ञानी’
२६.०७.२०१६

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