तुझसे ही हस्ती मेरी

तेरे कदमों तले दुनिया बसती मेरी ,
तेरे आशीष से ही माँ है हस्ती मेरी ।

अपने हाथों मुझको वो खिलाना तेरा,
मुझको अपने सीने से लगाना तेरा ।

पाकर के तुझको धन्य हुआ जीवन मेरा ,
तेरे गोद में हँसता है बचपन मेरा ।

आँखों की तेरी रौशनी से रौशन जहाँ ,
चेहरे की तेरी सादगी पर कुदरत फ़िदा ।

जिधर भी देखे जीवन उधर ही होता है ,
तेरी ममता के साये में वो खुद सोता है ।

सुनने को बेटा तेरी जबाँ से काने तरसती ,
भरी दुनिया में तुझको ढूंढें आँखे भटकती ।

प्यार को तेरे दिल में बसाकर मैं गा रहा ,
तेरी हँसी को चेहरे पर अपने अपना रहा ।

मेरी किस्मत ये है कि माँ तू है मेरी ,
जुडी रहेंगी हरदम मुझसे यादें तेरी ।

तेरे कदमों तले दुनिया बसती मेरी ,
ओ मेरी माँ ! तुझसे ही हस्ती मेरी ।

निशांत चौबे ‘अज्ञानी’
०४.१०.२०१६

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