जो तुम कहो

जो तुम कहो तो दिन हो
जो तुम कहो तो रात ,
निगाहे ही करे अब
निगाहो से बात ।

ना जाने कब मेरा दिल
तेरा हो गया ,
ज़ुल्फो के तेरे साये में
ये कब खो गया ,
मुझे तो कुछ पता नहीं
मेरी ना कुछ खता ।

धड़कन को तेरे मेरे
धड़कन ने चुन लिया ,
तुझी को हमसफ़र इस
दिल ने चुन लिया ,
तेरे बिन ना दिन होता
ढलती ना अब ये शाम ।

अफसाना अब हमारा
सब दोहराएँगे ,
जाने के बाद भी सनम
हम याद आएँगे ,
समय के श्वेत पत्र पर
हम छोड़ते निशां |

निशांत चौबे ‘अज्ञानी’
०८.०४.२०१४

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